सर्वांगीण विकास और अधिकार
All-round development and rights
मनुष्य और समाज के हर पहलू को व्यापक समझ के साथ देखकर ही वास्तविक विकास संभव है। इसलिए संवैधानिक, मनोवैज्ञानिक और मौलिक अ…
पढ़ें →कुल 83 पोस्ट उपलब्ध
चैतन्य संदेश
मनुष्य और समाज के हर पहलू को व्यापक समझ के साथ देखकर ही वास्तविक विकास संभव है। इसलिए संवैधानिक, मनोवैज्ञानिक और मौलिक अ…
पढ़ें →
चैतन्य संदेश
यदि व्यक्ति समाज और जीवन के सभी पक्षों को व्यापक दृष्टि से समझते हुए निरंतर गतिशील रहना चाहता है, तो उसे केवल अपनी सीमित…
पढ़ें →
चैतन्य संदेश
समाज में उठने वाले प्रश्न यदि केवल विरोध का कारण न बनकर चिंतन और संवाद का आधार बनें, तो वे व्यवस्था को बेहतर बनाने की शक…
पढ़ें →
चैतन्य सूत्र
जीवन में विकास तभी संभव है, जब हम समय-समय पर स्वयं से पूछें—क्या मेरी सोच स्पष्ट है? क्या मेरा ज्ञान शुद्ध और तथ्यपूर्ण …
पढ़ें →
चैतन्य संकल्प
किसी समाज के सभ्य होने की पहचान केवल उसकी आधुनिकता या विकास से नहीं होती, बल्कि इस बात से होती है कि वहाँ न्याय, संवेदनश…
पढ़ें →
चैतन्य संदेश
जब कोई व्यवस्था अपने ही बनाए हुए जाल में फंस जाती है ,तब उसे एक नई दृष्टि, नई सोच और नए तरीके की जरुरत होती है उस जाल से…
पढ़ें →
चैतन्य संदेश
आज शिक्षा की गुणवत्ता पर सबको गंभीरता से विचार करने की आवश्यकता है। शिक्षा केवल एक ऐसी व्यवस्था नहीं होनी चाहिए जिसमें ब…
पढ़ें →
चैतन्य संदेश
माँ से जुड़ी चीज़ों को महत्व देने के बावजूद, बेटे से जुड़ी किसी समस्या या कमी का कारण पिता या ‘पितृदोष’ को मान लेना उचित…
पढ़ें →
चैतन्य संदेश
किसी बात को मानने या समझाने से पहले उसकी सच्चाई स्वयं जाँचें…
पढ़ें →
चैतन्य संदेश
सही ज्ञान होने के बाद भी गलत रास्ता चुनना, स्वयं अपने जीवन को अंधकार में धकेलना है…
पढ़ें →
चैतन्य संदेश
सिर्फ किसी गुरु, धर्म या परंपरा को आँख बंद करके मानने के बजाय सत्य को समझें, स्वयं विचार करें और व्यापक ज्ञान के आधार पर…
पढ़ें →
चैतन्य संदेश
हर व्यक्ति के भीतर अपनी क्षमताओं और संभावनाओं को पहचानने की क्षमता होती है। आवश्यकता है स्वयं को समझने, अपनी योग्यता को …
पढ़ें →