अभ्यास से आती है निपुणता

अभ्यास से आती है निपुणता
मनुष्य किसी भी कार्य में पहली बार में पूर्ण निपुण नहीं होता। लेकिन जब वह किसी कार्य को लगातार अभ्यास और धैर्य के साथ दोहराता रहता है, तो धीरे-धीरे वही कार्य उसके लिए सहज और स्वाभाविक बन जाता है।
अभ्यास की निरंतरता साधारण प्रयास को भी असाधारण कौशल में बदल देती है।
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