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जैसी हमारी दृष्टि, वैसी मानसिक सृष्टि

हमारी जो मानसिक सृष्टि है वो सिर्फ हमारे पेशे पर ही निर्भर नहीं होती बल्कि इस पर भी निर्भर होती है कि हमारा परिवार, संस…

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सार्वभौमिक समझ विकसित अभियान

श्रीचैतन्यराष्ट्र संघ के माध्यम से कोड यूनिटी लाइफ की प्राप्ति हो रही है — भ्रम आवरण निराकरण हो रहें हैं। संज्ञानसर्जरी …

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शिक्षा: अधिकार या समझौता?

आज शिक्षा की गुणवत्ता पर सबको गंभीरता से विचार करने की आवश्यकता है। शिक्षा केवल एक ऐसी व्यवस्था नहीं होनी चाहिए जिसमें ब…

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अंधविश्वास नहीं, समझ बढ़ाएँ

माँ से जुड़ी चीज़ों को महत्व देने के बावजूद, बेटे से जुड़ी किसी समस्या या कमी का कारण पिता या ‘पितृदोष’ को मान लेना उचित…

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सत्य की स्वयं जाँच

किसी बात को मानने या समझाने से पहले उसकी सच्चाई स्वयं जाँचें…

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सही ज्ञान, गलत दिशा

सही ज्ञान होने के बाद भी गलत रास्ता चुनना, स्वयं अपने जीवन को अंधकार में धकेलना है…

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मानने से पहले जानो

सिर्फ किसी गुरु, धर्म या परंपरा को आँख बंद करके मानने के बजाय सत्य को समझें, स्वयं विचार करें और व्यापक ज्ञान के आधार पर…

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स्वयं की क्षमता की पहचान

हर व्यक्ति के भीतर अपनी क्षमताओं और संभावनाओं को पहचानने की क्षमता होती है। आवश्यकता है स्वयं को समझने, अपनी योग्यता को …

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आत्मपरीक्षण का दर्पण

मनुष्य को अपनी कमियों, खूबियों और वास्तविक व्यक्तित्व को समझने के लिए आत्मनिरीक्षण करना चाहिए। जब हम स्वयं का ईमानदारी स…

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चेतना का प्रकाश

सच्ची चेतना व्यक्ति को भ्रम में फँसने के बजाय समय की समस्याओं को समझने, सही निर्णय लेने और अपनी सोच को विकसित करने की शक…

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समस्याओं का कारण ग्रह नहीं, हमारे कर्म हैं।

अपनी समस्याओं का दोष हमेशा ग्रहों, भाग्य या परिस्थितियों को देने के बजाय हमें अपने कर्मों और निर्णयों को देखना चाहिए।…

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माता-पिता के त्याग का एहसास

बचपन में माता-पिता हमारी अधिकांश जरूरतें पूरी करते हैं, इसलिए जीवन आसान लगता है। लेकिन जब हम बड़े होकर अपनी जरूरतों, शिक…

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