जागरूकता, चेतना और राष्ट्रनिर्माण

जागरूकता, चेतना और राष्ट्रनिर्माण
मनुष्य चाहे किसी भी व्यवसाय, पद या क्षेत्र में कार्य करता हो, उसे अपने व्यक्तिगत कार्यों के साथ-साथ समाज और राष्ट्र के प्रति जागरूक एवं जिम्मेदार रहना चाहिए। अपने ज्ञान, क्षमता और मेहनत का श्रेष्ठ उपयोग राष्ट्रहित और समाज के विकास के लिए करना ही सच्चे राष्ट्रकर्म की भावना है।
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