समय और सार्वजनिक कार्यों की अमर स्मृति
मनुष्य का जीवन सीमित है, लेकिन यदि वह समाज और जनहित के लिए अच्छे, रचनात्मक तथा उपयोगी कार्य करता है, तो उसके कार्य उसकी मृत्यु या जीवनकाल के बाद भी लोगों की स्मृतियों में बने रहते हैं। इसलिए जीवन को केवल अपने लिए नहीं, बल्कि सर्वजन हित और समाज के विकास के लिए सार्थक बनाना चाहिए।
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