टिकाऊ विकास का आधार

टिकाऊ विकास का आधार
अपने मूल्यों, ज्ञान, संसाधनों और जिम्मेदारियों के संतुलित उपयोग से स्वयं को विकसित और टिकाऊ बनाए रखना ही स्वधार्यता है। अर्थात, केवल दूसरों पर निर्भर रहने के बजाय अपने ज्ञान, संसाधनों और जिम्मेदारियों का सही उपयोग करके स्वावलंबी और निरंतर विकसित बने रहना ही स्वधार्यता का भाव है।
← सभी पोस्ट देखें