सोच का परिष्कार ही समाज का संस्कार है।

सोच का परिष्कार ही समाज का संस्कार है।
"चाहे कोई हमारी बात माने या न माने, हमारा उद्देश्य लोगों की सोच को परखते हुए उसे समझना और सुधारना है। हम ऐसी मानसिकता (Mindset) विकसित करने का प्रयास कर रहे हैं जो पहले असंतुलित (Upset) या अनुपयुक्त (Unfit) थी। हमारा मानना है कि जब विचारों में सही परिवर्तन (Update) आता है, तभी समाज और परंपरा का स्वस्थ विकास होता है।"
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