स्वयं को जानने की कला

स्वयं को जानने की कला
जब कोई व्यक्ति बिना पक्षपात के अपने विचारों, भावनाओं और कर्मों को ईमानदारी से परखना शुरू करता है, तब उसे अपनी कमियों और अच्छाइयों का सही ज्ञान होने लगता है। यही आत्मनिरीक्षण उसे सही-गलत का विवेक, स्वयं को सुधारने की प्रेरणा और मानसिक व आध्यात्मिक परिपक्वता प्रदान करता है।
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