सर्वमनोभूमियों के धरातल पर
सार्वभौमिक संज्ञानसर्जरी
समझ विकास से उपलब्ध
A movement where every human can ask: What is truth?
"मानने से पहले जानो, और जानने के बाद ही मानो। जब तक हर मनुष्य में खुद सोचने की योग्यता नहीं जागती, तब तक कोई भी राष्ट्र चैतन्य नहीं हो सकता। संज्ञानसर्जरी कोई वाद नहीं, समाज के भ्रम का उपचार है।" — कार्ष्णि प्रभाकर शास्त्री
हमारा संकल्प
श्रीचैतन्यराष्ट्र संघ 🌞 का संकल्प है कि धर्म, समाज और राजनीति के विमर्श को टीका-टिप्पणी के अखाड़े से निकालकर "समझ विकास" की प्रयोगशाला बनाया जाए। यहाँ हम जवाब थोपते नहीं, बेहतर प्रश्न पूछने का साहस जगाते हैं।
हमारा धरातल है — सर्वमनोभूमि। जहाँ हम सब एक साथ मनुष्य के रूप में खड़े होकर पूछ सकें: सार्वभौमिक सत्य क्या है?
तर्क से ऊपर विवेक,
विवाद से ऊपर संवाद"
यहाँ हम जवाब नहीं देते,
बेहतर
प्रश्न पूछने में मदद करते हैं।
"मानने से पहले जानो, और जानने के बाद ही मानो। जब तक हर मनुष्य में खुद सोचने की योग्यता नहीं जागती, तब तक कोई भी राष्ट्र चैतन्य नहीं हो सकता। संज्ञानसर्जरी कोई वाद नहीं, समाज के भ्रम का उपचार है।"
संज्ञानसर्जरी — 3 चरण
समाज के भ्रम का चिकित्सीय उपचार — निदान से पुनर्वास तक।
निदान
समाज में फैले भय, पूर्वाग्रह और अंधविश्वास की गाँठों को पहचानना। बिना किसी आरोप-प्रत्यारोप के।
उपचार
तर्क, अनुभव और सार्वभौमिक मूल्यों के प्रकाश से विवेक जगाना। चोट पहुँचाना नहीं, उपचार करना।
पुनर्वास
हर व्यक्ति को "सार्वभौमिक साक्षर" बनाना — ताकि वह खुद परख सके कि सच क्या है।
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